नमाज़: इस्लामी इबादत

सलात (अरबी: صَلَاة) दिन में पांच बार अदा की जाने वाली इस्लामी इबादत है। इस्लाम का दूसरा रुक्न। यह गाइड नमाज़ के अरकान, वाजिबात और सुन्नतों पर चर्चा करती है।

नमाज़ क्या है?

नमाज़ मुसलमान और अल्लाह के बीच सीधा संबंध है। दिन में पांच बार निर्धारित समय पर अदा होती है — फ़ज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा। हर नमाज़ निर्धारित रकातों पर आधारित है।

नमाज़ से पहले पवित्र होना ज़रूरी है (ग़ुस्ल या वुज़ू), क़िब्ला की ओर मुंह करना और सतर ढकना।

पांच वक़्त की नमाज़ें

नमाज़ अरबी समय रकात
Fajrالفجرफ़ज्र से पहले2
Dhuhrالظهرदोपहर बाद4
Asrالعصرअस्र4
Maghribالمغربसूर्यास्त बाद3
Ishaالعشاءरात4

अरकान, वाजिबात और सुन्नतें

उलेमा नमाज़ के हिस्सों को तीन स्तरों में बांटते हैं:

नमाज़ के 14 अरकान

ये नमाज़ के अनिवार्य हिस्से हैं।

  1. क़ियाम (खड़े होना)

    फ़र्ज़ नमाज़ में खड़े होना।

  2. तकबीरे तहरीमा

    "अल्लाहु अकबर" कहकर शुरू।

  3. सूरह फ़ातिहा पढ़ना

    हर रकात में।

  4. रुकू

    सीधी कमर, हाथ घुटनों पर।

  5. रुकू से उठना

    सीधे खड़े होना।

  6. सीधे खड़े होना

    रुकू से उठकर स्थिर होना।

  7. सजदा

    माथा, नाक, हथेलियां, घुटने और पैर की उंगलियां ज़मीन पर।

  8. सजदे से उठना

    उठना।

  9. दो सजदों के बीच बैठना

    संक्षिप्त बैठना।

  10. तुमानीनत

    हर हालत में स्थिर रहना।

  11. आख़िरी तशह्हुद

    आख़िरी रकात में तशह्हुद पढ़ना।

  12. आख़िरी तशह्हुद के लिए बैठना

    सही तरीक़े से बैठना।

  13. दो सलाम

    "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह" दाएं फिर बाएं।

  14. तरतीब से अरकान अदा करना

    सही क्रम में।

नमाज़ के 8 वाजिबात

भूलने पर सजदा-ए-सहव।

  1. तकबीरे इंतिक़ाल

    "अल्लाहु अकबर" हालत बदलते वक़्त।

  2. सम​िअल्लाहु लिमन हमिदह

    रुकू से उठते वक़्त।

  3. रब्बना व लकल हम्द

    रुकू से उठने के बाद।

  4. रुकू में सुब्हान रब्बियल अज़ीम

    कम से कम एक बार।

  5. सजदे में सुब्हान रब्बियल आला

    कम से कम एक बार।

  6. रब्बिग़्फ़िर ली

    दो सजदों के बीच।

  7. पहला तशह्हुद

    नमाज़ के बीच में।

  8. पहले तशह्हुद के लिए बैठना

    सही हालत में।

नमाज़ की सुन्नतें

मुस्तहब अमल। छोड़ने से नमाज़ बातिल नहीं।

क़ौली सुन्नतें

  1. दुआ-ए-इस्तिफ्ताह

    तकबीर के बाद: "सुब्हानक अल्लाहुम्मा..."

  2. तअव्वुज़

    "अऊज़ु बिल्लाहि..."

  3. बिस्मिल्लाह

    फ़ातिहा से पहले।

  4. आमीन

    फ़ातिहा के बाद।

  5. फ़ातिहा के बाद सूरत

    पहली दो रकातों में।

  6. ऊंची आवाज़ (इमाम)

    फ़ज्र, मग़रिब और इशा में।

  7. अतिरिक्त तस्बीह

    एक से ज़्यादा बार।

  8. रब्बिग़्फ़िर ली एक से ज़्यादा

    दो सजदों के बीच।

  9. आख़िरी तशह्हुद में दरूद

    नबी के परिवार पर दरूद और दुआ।

फ़ेअली सुन्नतें

  1. तकबीर में हाथ उठाना

    कंधे या कान तक।

  2. दायां हाथ बाएं पर

    सीने पर खड़े होकर।

  3. सजदे की जगह देखना

    जहां माथा लगेगा।

  4. पैर खुले

    कंधों की चौड़ाई।

  5. रुकू में घुटने पकड़ना

    उंगलियां फैला कर।

  6. सही सजदे की मुद्रा

    कोहनियां अलग।

  7. इफ्तिराश और तवर्रुक

    सही बैठने की स्थिति।

  8. शहादत की उंगली से इशारा

    तशह्हुद में।

  9. सलाम में दाएं-बाएं मुड़ना

    पहले दाएं, फिर बाएं।

नए मुसलमानों के लिए सुझाव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पांच नमाज़ें कौन सी?

फ़ज्र (2), ज़ुहर (4), अस्र (4), मग़रिब (3), इशा (4)। कुल 17 रकात।

नमाज़ में ग़लती हो जाए?

वाजिब भूलने पर सजदा-ए-सहव। सुन्नत भूलने पर नमाज़ सही।

अरबी में पढ़ना ज़रूरी?

फ़ातिहा और ख़ास अज़कार अरबी में। धीरे-धीरे सीखें।

किस दिशा में?

क़िब्ला — मक्का में काबा की ओर।

रुक्न और वाजिब का फ़र्क़?

रुक्न छोड़ने से बातिल; वाजिब भूलने पर सजदा-ए-सहव।

बैठकर नमाज़?

हां, खड़े न हो सकें तो बैठकर।

क्या पहनें?

पुरुष: नाभि से घुटने। महिला: चेहरे-हाथों के अलावा सब।

जायनमाज़ ज़रूरी?

फ़र्ज़ नहीं। किसी भी साफ़ जगह पर।

स्रोत

सहीह इस्लामी स्रोतों पर आधारित।

अपना सफ़र जारी रखें

नमाज़ उम्र भर का सफ़र है। क़दम-ब-क़दम आगे बढ़ें।